कोलकाता | मई 2026
एक महत्वपूर्ण फैसले में Calcutta High Court ने Election Commission of India के अधिकारों को बरकरार रखते हुए Trinamool Congress (TMC) नेताओं द्वारा दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया। ये याचिकाएं पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मतगणना से पहले लिए गए कुछ प्रशासनिक फैसलों को चुनौती दे रही थीं।
न्यायमूर्ति Krishna Rao की पीठ ने केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों और केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रम (PSU) के कर्मचारियों को मतगणना सुपरवाइजर और असिस्टेंट नियुक्त करने के चुनाव आयोग के फैसले को वैध ठहराया। साथ ही, कस्बा विधानसभा क्षेत्र में मतगणना केंद्र के स्थान परिवर्तन को भी सही माना।
विवाद की पृष्ठभूमि
30 अप्रैल को चुनाव आयोग द्वारा जारी एक निर्देश में कहा गया था कि:
👉 हर मतगणना टेबल पर कम से कम एक अधिकारी केंद्रीय सरकार या केंद्रीय PSU से होना चाहिए
इसी निर्देश को TMC सांसद कल्याण बनर्जी और विधायक जावेद अहमद खान ने चुनौती दी। याचिकाओं में आरोप लगाया गया:
- राज्य चुनाव अधिकारियों के पास ऐसा आदेश देने का अधिकार नहीं था
- केंद्रीय कर्मचारियों की नियुक्ति से पक्षपात हो सकता है
- मतगणना केंद्र बदलने में प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया
अदालत के प्रमुख निष्कर्ष
🔹 1. केंद्रीय कर्मचारियों की नियुक्ति में कोई अवैधता नहीं
अदालत ने कहा:
- कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो केवल राज्य कर्मचारियों को ही नियुक्त करने की बाध्यता देता हो
- नियुक्ति का अधिकार चुनाव आयोग के विवेक पर निर्भर करता है
🔹 2. पक्षपात के आरोप निराधार
अदालत ने स्पष्ट किया:
- याचिकाकर्ताओं ने कोई ठोस सबूत प्रस्तुत नहीं किया
- केवल आशंका के आधार पर निर्णय को चुनौती नहीं दी जा सकती
- CCTV, माइक्रो ऑब्जर्वर और एजेंटों की मौजूदगी से पारदर्शिता सुनिश्चित होती है
🔹 3. मतगणना केंद्र बदलने का अधिकार वैध
कस्बा सीट के मामले में:
- गीताांजलि स्टेडियम से विहारिलाल कॉलेज स्थानांतरण को सही ठहराया गया
- यह निर्णय प्रशासनिक सुविधा, सुरक्षा और केंद्रीकृत मतगणना के लिए लिया गया
🔹 4. चुनाव के दौरान न्यायिक हस्तक्षेप सीमित
अदालत ने कहा:
- चुनाव एक सतत प्रक्रिया है
- इस दौरान न्यायालय को हस्तक्षेप से बचना चाहिए
- किसी भी शिकायत का समाधान चुनाव के बाद चुनाव याचिका के माध्यम से किया जा सकता है
| श्रेणी | प्रावधान/मामले | मुख्य बिंदु |
|---|---|---|
| संवैधानिक आधार | अनुच्छेद 324 | Election Commission of India को चुनाव कराने के लिए व्यापक और स्वतंत्र शक्तियां प्रदान करता है |
| संवैधानिक आधार | N.P. Ponnuswami बनाम रिटर्निंग ऑफिसर (1952) | चुनाव प्रक्रिया के दौरान न्यायालय का हस्तक्षेप सीमित होना चाहिए |
| संवैधानिक आधार | Mohinder Singh Gill बनाम मुख्य चुनाव आयुक्त (1978) | विवादों का समाधान चुनाव के बाद किया जाना चाहिए |
| कानूनी (Statutory) आधार | Representation of the People Act, 1951 (धारा 100) | चुनाव परिणाम को चुनौती देने का अधिकार प्रदान करती है |
| कानूनी (Statutory) आधार | Conduct of Election Rules, 1961 | मतगणना प्रक्रिया और अधिकारियों की नियुक्ति को नियंत्रित करती है; केवल राज्य कर्मचारियों तक सीमित नहीं |
अंतिम निष्कर्ष: Calcutta High Court ने स्पष्ट किया कि Election Commission of India ने अपने संवैधानिक अधिकारों के भीतर रहकर निर्णय लिया है और याचिकाएं तथ्यात्मक आधार पर कमजोर थीं। हालांकि, अदालत ने यह भी कहा कि यदि मतगणना में कोई अनियमितता पाई जाती है, तो संबंधित पक्ष चुनाव परिणाम को कानूनी रूप से चुनौती दे सकता है।
